आयुर्वेद में ही मिलेगा आपको पक्का इलाज

Updated: Aug 4, 2020


मधुमेह, बवासीर, अस्थमा, माइग्रेन जैसी बीमारी का इलाज आयुर्वेद में ही माना जाता है

जैसा कि हम जानते हैं है कि कोरोना वायरस एक वैश्विक महामारी है. सब कुछ बंद है और हर कोई अपने घर बैठा हुआ है. इस मुश्किल घड़ी में सभी को अवसर दिया है कि हम अपने समाज और तौर-तरीकों पर विचार करें. प्रकृति ने हमें अनगिनत अमूल्य उपहार दिए है. लेकिन हमने अपनी आधुनिकता के नाम पर उनको भुला दिया और नष्ट किया. आज के परिपेक्ष्य में, जब हमें कुछ ठहरने का समय मिला तो हमने अपनी गलतियों को अनुभव किया और यह माना कि प्रकृति द्वारा प्रदत्त आयुर्वेद ही हमें स्वस्थ और दीर्घ जीवन प्रदान कर सकता है.



भारत योग और आयुर्वेद की जन्मभूमि है, पर विडम्बना यह है कि हम भारतीयों ने ही योग और आयुर्वेद को भुला दिया. अंग्रेजी दवाओं को प्राथमिकता दी जाती है. ऐलोपैथी में चिकित्सक केवल बीमारी के लक्षणों पर ही कार्य करते हैं, न कि बीमारी के कारण पर. इनमें दवाओं द्वारा आंशिक उपचार प्रदान किया जाता है. आयुर्वेद को बीमारी के मूल में कार्य करने

लिए जाना जाता है. आयुर्वेद में पृथ्वी पर उपलब्ध प्रत्येक जड़, पत्ते, फल-फूल में औषधीय गुण है. हम उनमें से कुछ का ही उपयोग जानते है. प्रकृति हमारे शरीश की निर्माता है. अत: शरीर में व्याधि उत्पन्न होने पर प्रकृति ही उसका निराकरण कर सकती है. हमारा शरीर प्रकृति द्वारा प्रदान की गई वस्तुओं का ही समूह है. जब इस समूह में संतुलन बिगड़ता है तो शरीर में व्याधियां उत्पन्न होती है. इसको पुन: सुधारने के लिए आयुर्वेद ही सर्वोत्तम उपाय है. ऐलोपैथी में सबसे बड़ी नकारात्मक बात साइड इफैक्ट है.




ऐलोपैथ शरीर की एक परेशानी दूर करती है. साथ ही अनेक अन्य परेशानियां पैदा करती है. उनके लिए फिर और दवायें लेनी पड़ती है.ऐलोपैथी आपातकालीन चिकित्सा तक ही समितित रखी जाये तो ठीक है परन्तु मधुमेह, बवासीर, अस्थमा, माइग्रेन, ह्दय संबंधी बीमारी, थाइराइड जैसी व्याधियों के लिए आयुर्वेद ही सर्वोत्म है. ऐलोपैथी में इनका उपचार नहीं है...

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